ABOUT SHREE AMAR BIHARI JI PATHAK

Amar Bihari Ji Pathak

वैदिक व्यास परम्परा की वाग्धारा के रसमय वाहक श्रद्धेय श्री अमर बिहारी जी पाठक जी का जन्म श्रीधाम वृन्दावन में हुआ। आपके पूज्य पिता पंडित ध्रुव कुमार जी पाठक एवं माता श्रीमती विमलादेवी पाठक निष्ठावान भगवत्प्रेमी हैं। आपके पिताजी बिहारी जी के अनन्य भक्त हैं। उन्होंने अपनी सभी संतानों के नाम बिहारी जी से ही सम्बंधित रखे हैं। जिसमें सबसे बड़े पुत्र का नाम कुंज बिहारी जी, बहन का नाम ललिता जी, मंझले पुत्र का नाम बाँके बिहारी जी और फिर कनिष्ठ पुत्र का नाम संतों द्वारा प्राप्त हुआ जिनको हम और आप अमर बिहारी जी के नाम से जानते हैं।

( The Amar bihari ji pathak was born in shri dham vrindavan. His parent Mr. dhruv kumar ji pathak and mrs vimla devi pathak is loyal lover of the bhagwat. Your father is the exclusive devotee of bihari ji. The All children names has kept related the bihari ji by himself. His eldest son is name kunj bihari and sister 's name is lalita. and the name of the middle son is banke bihari. His youngest son 's name has given by scholars. We know him the name of Amar Bihari. )


Shri Dhruv Kumar ji(Father of Amar Bihari ji)

श्री अमर बिहारी जी ने अपने पूज्य पिताजी से ही बचपन में रामायण एवं भागवत का मनोयोग से श्रवण किया। महाविद्यालय की शिक्षा पूर्ण कर आपने आचार्य जी श्रीकीर्तीलालजी गोस्वामी से वैष्णव दीक्षा ग्रहण की और प्रातः स्मरणीय गोलोकवासी श्रीवृन्दावनबिहारी मिश्र ' बिन्दुजी ' के द्वारा श्रीमदभागवत का आत्मसात किया। इन्ही की आज्ञा से श्रीपाठक जी ने गिरिराज महाराज की तलहटी में कई दिनों तक भगवदाश्रित रह तप किया।

( Amar bihari ji heared from his father the bhagwat and ramayan in a childhood. He received vaishnava initiation from his master mr kirti lal goswami after his college education. He assimilated of the bhagwat by shri Vrindavan bihari mishr ' Mr. Bindu Ji '. )


पुनः माता-पिता सदगुरुदेव के शुभाशीष प्रेरणा से आपने श्रीमद्भागवत अमृत का वर्षण ही जीवन का मुख्य उद्द्देश्य निर्धारित कर लिया। आपकी कथा शैली इतनी सरस और सरल है कि सभी श्रेणी के श्रोता भरपूर रसानन्द लेते हैं। आपकी संतों और ब्राह्मणों में विशेष निष्ठा है और गौ सेवा एवं दरिद्रनारायण की सेवा को भगवत तुल्य मानते हैं । श्रीअमरजी की शास्त्र सम्मत मान्यता है कि श्रीमद्भागवत श्रीराधाकृष्ण का साक्षात स्वरुप ही है।

( He decided his aim that he will do delineation of bhagwat by blessing his parents and master. Your narrative style is very piquant and simple. so All listener take enjoyment. Shri Amar Bihari' s faith have on sants and Brahmins and he serve of gau mata like bhagvad service. Sri Amar Bihari Ji have orthodox belief that shri Bhagwat is the symbol of Sri radha krishna. )